इश्क वाली शायरी – इश्क मोहब्बत की शायरी

इश्क वाली शायरी – इश्क मोहब्बत की शायरी

वो समा ही क्या जिसे कोई जलाने वाला ना हो
वो हुसन ही क्या जिसे कोई देखने वाला ना हो।

फूल खिलते हैं बहारों का समा होता है,
ऐसे मौसम में ही तो प्यार जवां होता है।

हमसे हमारी उम्र ना पूछना ए दोस्तो,
हम तो इश्क़ हैं, हमेशा ही जवां रहते।

प्यार करता हु इसलिए फ़िक्र करता हूँ,
नफरत करुगा तो जिक्र भी नही करुगा।

तेरे बाद किसी को प्यार से ना देखा हमने,
हमें इश्क का शौक है आवारगी का नही।

धड़कन संभालू या साँस काबू में करूँ,
तुझे नज़र भर देखने में आफत बहुत है।

आज दरगाह में मन्नत का धागा नहीं,
अपना दिल बाँध के आया हूँ तेरे लिए।

उनकी चाल ही काफी थी इस दिल के होश उड़ाने के लिए,
अब तो हद हो गई जब से वो पाँव में पायल पहनने लगे।

नींद से क्या शिकवा जो आती नही रात भर
कसुर तो उस चहरे का है जो सोने नही देता रात भर।

मरने के लिए वजह बहोत सारी हैं,
जीने के लिए सिर्फ ” तू “

क्या ऎसा नहीं हो सकता के हम तुमसे तुमको माँगे,
और तुम मुस्कुरा के कहो के अपनी चीजें माँगा नहीं करते

इश्क़ अधूरा रह जाए तो खुद पे नाज करना ग़ालिब
कहते हैं सच्ची मोहब्बत मुकम्मल नहीं होती।

जीना हराम कर रखा है मेरी इन आँखों ने,
खुली हो तो तलाश तेरी, बंद हो तो ख्वाब तेरे।

गलतियां भी इश्क़ की तरह होती है
करनी नही पड़ती हो जाती है।

लोग मुझसे पूछते है मेरी जान की क़ीमत
और मुझे तेरा मुस्कुराना याद आजाता है।

चाहे कितनी भी तकलीफ दे इश्क़,
पर सुकून भी इश्क़ से ही मिलता है।

लफ़्ज़ों से तुम मेरी तारीफ कर लो,
इश्क हम तेरी आंखो में ढूँढ लेंगे।

इश्क़ है या कुछ और ये तो पता नहीं,
पर जो तुमसे है वो किसी और से नही।

महफ़िल सजी है सनम भी Online हैं
हम कंफ्यूज हैं इश्क़ करे या शायरी?।

नज़ाक़त और ग़ुरूर होना चाहिये इश्क़ में
एक तरफ़ा ही सही पर सुरूर होना चाहिए इश्क़ में।

अक्सर दिखावे का प्यार ही ज्यादा शोर करता हैं,
वरना सच्ची मोहबत तो इशारो मे ही सिमट जाती।

इश्क़ की राह मैं दो ही मंज़िलें हैं
या दिल मैं उतर जाना, या दिल से उतर जाना।

इश्क़ की राह में, खुबसूरत क्या हैं,
एक मैं हूँ, एक तुम हो और जरूरत क्या हैं।

तेरे दिल में मेरी साँसों को, पनाह मिल जाये,
तेरे इश्क में मेरी जान, फ़ना हो जाये।

मिलावट है तेरे इश्क में इत्र और शराब की,
कभी हम महक जाते हैं कभी हम बहक जाते हैं।

एक तो मेरी चाहत और दुसरा इश्क का बुखार,
शहर का तापमान 50 डिग्री ना हो तो क्या हो।

गलत सुना था कि, इश्क आँखों से होता है,
दिल तो वो भी ले जाते है, जो पलकें तक नही उठाते।

वो कहने लगी, नकाब में भी पहचान लेते हो हजारों के बीच?
मैंने मुस्करा के कहा, तेरी आँखों से ही शुरू हुआ था इश्क हज़ारों के बीच।

नही पसन्द इश्क मे मिलावट मुझको,
अगर वो मेरा है, तो ख्वाब भी बस मेरे देखे।

एक हम हैं जो इश्क़ कि बारिश करते है,
एक तुम हो जो भीगने को तैयार ही नहीं।

कभी रुक न सकेगा तुमसे सिलसिला मेरी मोहब्बत का ऐ जान,
मेरा इश्क तेरी “हां” या “ना” का मोहताज नही।

#दिल में #बहुत_दर्द हे,
#डॉक्टर_# ने तेरी [ कमी ] बताई है

अदालत इश्क की होगी,
मुकादमा मोहब्बत पे चलेगा,
ग्वाही मेरा दिल देगा,
और मुज्रिम तेरा प्यार होगा

क्या हसीन इत्तेफाक़ था तेरी गली में आने का!
किसी काम से आये थे,
और किसी काम के ना रहे

पढ़ रहा हूँ मै इश्क़ की किताब ऐ दोस्तों,
ग़र बन गया वकील तो बेवफाओं की खैर नही

मेरा दुख़ सुनोगे तो तुम़ भी रो दोगे
#स्कूल टाइम में जो #लड़का ,मुझे
छुप़ छुप़ कर देख़ता था,
,बडा होकर #डॉक्टर बन गया है,
अब ‘देखने’ की #फीस लेता है।

किसी ने पूछा कभी इश्क हुआ था,
हम मुस्कुरा के बोले आज भी है।

इश्क़ है अगर तो शिकायत न कीजिए,
और शिकवे हैं तो मोहब्बत न कीजिए।

मेरी शायरी को मेरा इश्क़ ना समझना
ये तो मेरे नादान दिल की ख्वाहिशें हैं जो तुम्हें बयाँ करता।

मुझसा कोई जहान में नादान भी ना होगा
करके जो इश्क कहता है, कोई नुकसान भी ना होगा।

इश्क़ हुआ है तुमसे, बस यही ख़ता है मेरी.
तुम दिल हो, तुम मोहब्बत हो, और तुम ही कमजोरी हो मेरी।

​​हक़ से अगर दे तो ​नफरत​ भी सर आँखों पर​,
खैरात में तो तेरी मोहब्बत भी मंजूर नहीं।

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