मकर सक्रांति पर लगनेवाले ख़ास मेले in hindi

Makar sakranti fairs significance in hindi – मकर सक्रांति पर लगनेवाले ख़ास मेले

भारत में उत्सव के दौरान मेला एक ख़ास आकर्षण होता है वैसे भी मेले हमारी सांस्कृतिक ,सामाजिक और आर्थिक जीवन के केंद्र है मकर सक्रांति के दिन नदियों,ताल-तलैयों में स्नान कर दान करने की प्रथा रही है यह प्रथा अत्यंत प्राचीनकाल से चली आ रही है ऐसे में लोगो की आस्था और भीड़ मेले अक रूप धारण कर लेती है आइये आपको आज मकर सक्रांति पर लगने वाले कुछ प्रमुख मेलो के बारे में रोचक जानकारी बताते है

1. प्रयाग का माघ मेला

इलाहाबाद में गंगा-यमुना के संगम पर प्रति वर्ष मकर सक्रांति के अवसर पर विश्व प्रसिद्ध माघ मेले का आयोजन बड़े व्यापक स्तर पर किया जाता है जहा लाखो लोग संगम स्थल के पवित्र जल में डुबकी लगाकर स्नान करते है | माना जाता है कि इस दिन यहा स्नान करने से पूण्य फल मिलते है एक महीने तक चलनेवाले इस मेले के दौरान संगम की रेतीली भूमि पर तम्बुओ का शहर बस जाता है जहा श्रुधालू एक महीने तक कल्पवास भी करते है प्रयाग के अलावा वाराणसी ,हरिद्वार और गढ़ मुक्तेश्वर में भी स्नान और मेले का आयोजन किया जाता है |

2. पंजाब में मुक्तसर का मेला

मकर सक्रांति की पूर्व संध्या पर पंजाब में लोहड़ी मनाते है इस दिन अलाव जलाकर उसमे नये अन्न और मूंगफलीया भूनते है और खाते खिलाते है अगली सुबह पंजाब के सिखों में एतेहासिक कारणों से भी सक्रांति का विशेष महत्व है | मुक्तसर वह जिला है जहा गुरु गोविन्द सिंह जी ने मुगलों के विरुद्ध 1705 में अंतिम लड़ाई लड़ी थी | गुरु गोविन्द सिंह के प्राय: सभी साथियो ने हताश होकर साथ छोड़ दिया था | तब माई भागो नामक एक महिला की प्रेरणा से उनमे से 40 के महासिंह नामक सरदार के नेतृत्व में फिर उनके साथ चलने का संकल्प लिया |

3. बौंसी का मन्दार मेला

यह मेला 15 दिनों के लिए लगता है | भागलपुर प्रमंडल के बांका जिला स्थित काले ग्रेनाईट पत्थर से निर्मित 700 फीट ऊँचे मन्दार पर्वत स्थित मधुसूदन मन्दिर और पहाड़ के नीचे स्थित पापहारिणी सरोवर के संबध में अनेक कथाये प्रचलित है माना जाता है कि मंदार पर्वत का प्रयोग समुद्र मंथन में किया गया था हिन्दू मान्यता के अनुसार यह भगवान विष्णु का आश्रय स्थल है लोक मान्यता है कि पर्वत की तलहटी में स्थित पापहारिणी सरोवर में स्नान करने से कुष्ठ रोग से मुक्ति मिलती है सक्रांति के दिन लोग स्नान करके मन्दिर दर्शन ,पर्वत परिभ्रमण ,दही चुडा और तिलवा खाकर बौंसी के मेले का लुत्फ़ उठाते है

4. ओडिशा के नागफेनी गाँव की रथयात्रा

ओडिशा के नागफेनी गाँव में मकर सक्रांति के दिन 14 जनवरी को रथयात्रा का आयोजन होता है नागफेनी के एतेहासिक जगन्नाथ मन्दिर में भगवान जगन्नाथ ,भाई बलभद्र एवं बहन सुभद्रा सहित भगवान मकर ध्वज की मूर्ति है मकर सक्रांति के दिन मकरध्वज की विशेष पूजा होती है और रथयात्रा निकाली जाती है भगवान मकरध्वज के नाम पर इसे दोस्ती के पर्व के रूप में मनाया जाता है महिलाय एक दुसरे को उपहार देती है लोग सुबह बर्तन में सरसों तेल ,तिल और हल्दी म्मिलार्क शरीर पर लगाते है |