Bollywood Shahenshah Amitabh Bachchan Dialogues in hindi अमिताभ बच्चन डायलॉग्स

आज हम आपको Shahenshah Amitabh Bachchan Dialogues के बारे में बताएगे जिन्हे बॉलीवुड का सम्राट भी कहा जाता है। यह फ़िल्मी दुनिया के सबसे अनुभवशली अभिनेताओं में से एक है। आज भी फिल्म जगत में इनको टक्कर देने वाला कोई नहीं है। इनका जन्म 1 अक्टूबर, 1942 को भारत के इलाहाबाद में हुआ। अपने अलग अलग किरदारों से इन्होने भारत ही नहीं दुनिये के हर कोने में अपनी जगह बनाई है। और यही वजह है की Bollywood Shahenshah Amitabh Bachchan को आज सुपरस्टार के रूप में देखा जाता है।

मनोरंजन उद्योग में अपने योगदान के अलावा, अमिताभ बच्चन अपने परोपकारी कार्यों और सामाजिक पहलों के लिए जाने जाते हैं। फ़िल्मी जगत में मनोरजन और अपने योगदान के लिए इनको कही पुरस्कार से भी सम्मानित किया है जिनमें पद्म श्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण शामिल हैं। अमिताभ बच्चन की स्थायी लोकप्रियता और बॉलीवुड पर प्रभाव ने उन्हें भारतीय सिनेमा में एक महान शख्सियत बना दिया, जिससे उन्हें “शहंशाह” की उपाधि मिली और दुनिया भर के प्रशंसकों के दिलों में एक स्थायी जगह बन गई।

अमिताभ बच्चन के डायलाग इतने फेमस हुए की आज भी बड़ो से लेकर बच्चो तक की ज़ुबान पर रहते है । अमिताभ बच्चन अपनी फिल्मों में कुछ प्रतिष्ठित संवाद बोलने के लिए जाने जाते हैं और आज हम उन्ही Bollywood Shahenshah Amitabh Bachchan के डायलागस आप तक लेकर आए है। जिनको याद करके हमारी पुरानी यादे और ताजा हो जाए। अमिताभ बच्चन अपनी फिल्मों में कुछ प्रतिष्ठित संवाद बोलने के लिए जाने जाते हैं

Amitabh Bachchan Dialogues in hindi अमिताभ बच्चन डायलॉग्स

90’s Amitabh Bachchan Dialogue

Zanjeer (1973)

जब तक बैठने को न कहा जाए ,शराफत से खड़े रहो

दीवार (1975):

“आज मेरे पास गाड़ी है, बंगला है, पैसा है…तुम्हारे पास क्या है?”
“मैं आज भी फेंके हुए पैसे नहीं उठाता”

Amar Akbar Anthony (1977):

“I can talk English, I can walk English, I can laugh English because English is a very punny language.”

डॉन (1978):

“डॉन को पकडना मुश्किल ही नहीँ नामुमकिन हे।”

शहंशाह (1988):

“रिश्ते में तो हम तुम्हारे बाप लगते हैं, नाम है शहंशाह।”

सिलसिला(1981):

“मैं और मेरी तनहाई”

अग्निपथ (1990):

“विजय दीनानाथ चौहान, पूरा नाम। बाप का नाम दीनानाथ चौहान। मां कसम, जिंदगी में पहली बार किसने पूरा नाम लिया है मेरा।”

20’s Amitabh Bachchan Dialogue:-

मोहब्बतें (2000):

“परंपरा, प्रतिष्ठा, अनुशासन… ये गुरुकुल के तीन स्तंभ हैं।”

कभी ख़ुशी कभी ग़म (2001):

“वो एक अदभुत कहानी है। जो किसी ने कभी नहीं सुनी। जो किसी ने कभी नहीं सुनी।” “पैसा तो हर कोई कमा लेता है…लेकिन इज्जत कामना सबके बस की बात नहीं”

बागबान (2003):

“कुछ रिश्ते कर्ज की तरह होते हैं। जिन्हें निभाना पड़ता है।”

ब्लैक (2005):

“मैं देखती हूं और मैं सब कुछ सुनती हूं।”

सरकार (2005):

“आंखें तो छोड़ो, पूरी बॉडी का एक्स-रे निकाल दो।” ““मुझे जो सही लगता है मैं कर्ता हूं, फिर चाहे वो भगवान के खिलाफ हो, कानून के खिलाफ हो या प्योर सिस्टम के खिलाफ।”

कभी अलविदा ना कहना (2006):

“मुझे तो ये समझ में नहीं आता कि आप लोग प्यार कैसे करते हैं।”

पा (2009):

“मुझे एक अंजान सा दोस्त मिल गया, जिसका साथ में जीवन का आनंद ले रहा हूं।”

पीकू (2015):

“बाबा, ये आधुनिक समय है, रिश्तों में नाम के बहुत सवाल होते हैं।”

गुलाबी (2016):

“नहीं मतलब नहीं।”

102 नॉट आउट (2018):

“बाप रे, बेटा पुराना स्कूल।”

बदला (2019):

“माफ़ कर देना किसी के लिए भी आसान नहीं होता, और माफ़ करना भी।”

Related posts you may like

© Copyright 2024 NewsTriger - All Rights Reserved.